आप सभी पाठक गन का मै अर्चना अपने ब्लॉग पर हार्दिक करती हूँ .
.माह-ए-रमजान २९वे रोजी को हम सभी टीवी पर आख गडाए और रेडियो से कान सटाए बैठे रहे के कब
दीदार-इ-चाँद की ख़बर आये और हम सभी जश्न-ए-ईद में डूब जाये...खैर ऐसे कोई ख़बर तो न आई.आज जुमे को जब बाहर निकली तो देखा सब तरफ रौनके
ही रौनके है.हर दिल के दर पर और बाजारों में ये रौनके है जश्न-ए-ईद और गणपति पूजन की.ये ब्लॉग लिख ही रही थी की तभी रेडियो पर मौलाना साहब की दीदार-ए-चाँद की मुबारकबाद मिली. अब कल यानि शनिवार को इदुल फ़ित्र जश्न में और गणपति पूजन के उल्लास में सरोबार होंगे हम सब.हम बड़े ही lucky है की हम एक ऐसे देश में रहते है जहा पर हमें हर माह कोई न कोई ख़ुशी celebrate करने का मौका मिल ही जाता है और शायद इसी लिए हमारे देश को तीज तयोहारो का देश भी कहा जाता है,खुशियों का देश कहा जाता है.आप को य जानकर गौरव होगा की पूरी दूनिया में एक हमारा ही ऐसा देश है जहा साल में इतने सारे पर्व मनाये जाते है.पता है क्यू.....क्यू की हमारे देश में समस्त धर्म जाती और संस्क्रतियो के लोग रहते है.यहाँ का हर निवासी एक दूजे से नितांत भिन्न है खान-पान,वेश-भूषा,रीति-रिवाज़ भाषा और प्रांत में इन सब के बावजूद हम सब एक देश के वासी है, वसुधैव कुटुम्बकम को मान आपसी प्रेम सौहार्द और एकता की महत्ता को समझते है.क्यू की बचपन से हम सभी ने वो कहानी लकड़ी के गट्ठर वाली जिसमे एकत्रित लकड़ियों को तोडना न मुमकिन था और गट्ठर खोल सब अलग अलग कर इनहे तोडना चुटकियो का काम था,एकता के ऐसे कई उदाहरण हम अपने आस पास देखते है.जैसे के बूँद बूँद मिल कर तालाब और नदियों को बनती,तिनका तिनका मिल कर रस्सी बनती जो मदमस्त हाथी तक को काबू करती,तिनके के सामान सी चीटी एक एक मिल कतार बनाती और बड़ी से बड़ी चीजो का स्थान परिवर्तित कर देती अलग अलग जब सात रंग मिलती तो इन्द्रधनुष बनता और बिलकुल वैसी हे जब भिन्न भिन्न ल्धर्म संस्क्रती मिली तो हमारा देश बना.
good! isi tarah likhati raho..
जवाब देंहटाएंshubhkamnayen!