वैसे celebration चाहे कोई सा भी हो, मज़ा तो तब आता है जब सभी उस जश्न में शरीक हो..... यही आपसी प्यार ही तो हमें इतनी विविधाताओ के बाद भी एकता के सूत्र में पिरोए रहता है...और शायद इसी लिए तो हमारे देश में जितनी उत्सुकता से गुजिया पापड़ का इतज़ार किया जाता है,उतनी ही बेसब्री से ईद की किवामी और ज़र्दा सिवइयो व क्रिसमस के सोफ्ट स्पंजी मज़ेदार केक का भी इंतजार किया जाता है....ये दिन वाकई है बेहद ख़ास जब हम सभी उत्सव के जश्न में डूबे है...हिन्दू भाई जहा गणपति उत्सव और कजरी तीज से हर्षित है, वही हमारे मुस्लिम भाई इदुल फ़ित्र के जश्न में सरोबार है.और हमारे जैन बंधू अपने नये कैलेंडर का शुभारम्भ कर रहे है...ये दिन वाकई जश्न-ए-गुलिस्ता है. जिसकी एक ही डाली पर लगे है कई रंग और खुशबुओं के फूल जिनका मकसद है एक "चारो ओर खुशहाली". दुनिया भर में मनाया जाने वाला इदुल फ़ित्र यानी ईद अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है "लौट कर आना". यानि बरकतों का महीना माह-ए-रमजान जल्द फिर लौट कर आये. इस माह में सभी रोज़ेदार(रोज़े रखने वाले बन्दे)ये साबित करते है की ऊपर वाले के हुक्म पर वे भूख प्यास जैसे कष्टों को भी सह सकते है. कही न कही ये रोज़े सभी को गरीब की दिक्कतों को महसूस करने का मौका देते है, और सदके-ए-फ़ित्र के ज़रिये रोजेदार अपनी मदद गरीबो तक पहुचाते है. ईद अल्लाह की तरफ से सभी रोजेदारो को दिया गया इनाम है जिन्होंने अल्लाह के हुक्म को मान ३० दिन तक अपने इम्तेहान को पास किया. अपने तन और मन को काबू कर दिखाया,मजलूमों की तकलीफे महसूस की, उनकी मदद की, किसी को दुःख न दिया और तहे दिल से ऊपर वाले की इबादत की. इसलिए अल्लाह उन्हें ईद मानाने का मौका देता है. ईद की विशेष नमाज़ जहा सामूहिक इबादत करने का मौका देती है वही एक दूजे को गले लगा ईद मुबारक कहने का रिवाज सामूहिक भाईचारे की भावना पैदा करता है. जश्न-ए-ईद हमे सन्देश देता है की पुरी दुनिया अल्लाहताला का घर है. हर जश्न की खुमारी सबसे जयादा बच्चों में देखने को मिलती है और हो भी क्यू न...आखिर नए कपडे, ईदी और लाजीज़ पकवान जो शामिल होते है...
तो खुशियों के इन त्योहारों में सभी को गले लगाये ...
और हाँ गले से गले नहीं बल्कि दिल से दिल भी मिलाये....
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